![]() |
🇮🇳 भारत के प्रमुख पर्यावरणीय सम्मेलन और नीतियाँ
प्रस्तावना
भारत एक ऐसा देश है जहाँ प्राकृतिक संसाधनों की विविधता पाई जाती है – हिमालयी पर्वत, घने वन, नदियाँ, समुद्र, जैव विविधता आदि। लेकिन बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण और प्रदूषण ने पर्यावरण पर गहरा असर डाला है। इसी कारण, भारत ने समय-समय पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मेलन और नीतियाँ बनाई हैं ताकि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को सुनिश्चित किया जा सके।
---
भारत में पर्यावरणीय सम्मेलन
1. संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन (स्टॉकहोम सम्मेलन, 1972)
यह पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था जिसमें भारत ने हिस्सा लिया।
भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसमें कहा – “Poverty is the greatest polluter” (गरीबी सबसे बड़ा प्रदूषक है)।
इस सम्मेलन के बाद भारत में पर्यावरण मंत्रालय और कई कानून बने।
2. पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Rio Summit, 1992)
ब्राज़ील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित।
इसमें "Agenda 21" पर जोर दिया गया।
भारत ने सतत विकास (Sustainable Development) और जैव विविधता संरक्षण की प्रतिबद्धता दिखाई।
3. क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol, 1997)
इसमें ग्रीनहाउस गैसों को कम करने की बात की गई।
भारत को "Annex-1" देशों में शामिल नहीं किया गया, इसलिए भारत पर कानूनी रूप से उत्सर्जन कम करने का दबाव नहीं था।
लेकिन भारत ने स्वेच्छा से कई कदम उठाए।
4. पेरिस समझौता (Paris Agreement, 2015)
इसका उद्देश्य है ग्लोबल वार्मिंग को 2°C से कम रखना।
भारत ने 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन में 33–35% कमी लाने का संकल्प लिया।
International Solar Alliance (ISA) की शुरुआत भारत और फ्रांस ने मिलकर की।
---
भारत की प्रमुख पर्यावरणीय नीतियाँ
1. राष्ट्रीय पर्यावरण नीति (2006)
यह नीति पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत विकास पर आधारित है।
इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और जन-जागरूकता बढ़ाना है।
2. वन नीति (1988)
इसमें कहा गया कि भारत के कम से कम 33% भू-भाग पर वन क्षेत्र होना चाहिए।
वनों और वन्य जीवों की सुरक्षा पर जोर।
3. राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC, 2008)
भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए यह योजना बनाई।
इसमें 8 प्रमुख "Mission" शामिल हैं:
1. राष्ट्रीय सौर मिशन
2. ऊर्जा दक्षता मिशन
3. सतत कृषि मिशन
4. हिमालयन इकोसिस्टम संरक्षण मिशन आदि।
4. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
भोपाल गैस त्रासदी (1984) के बाद यह कानून बना।
इसका उद्देश्य है – प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण की रक्षा।
5. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT, 2010)
पर्यावरण विवादों और मामलों को सुलझाने के लिए NGT बनाया गया।
यह तेज़ी से पर्यावरण से जुड़े मामलों का निपटारा करता है।
6. प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम (2016, संशोधित 2022)
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर रोक।
कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग पर जोर।
---
भारत की हाल की पहल
स्वच्छ भारत अभियान (2014) – सफाई और कचरा प्रबंधन पर फोकस।
राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन नीति (2019) – ईंधन पर निर्भरता कम करना।
एक भारत – ग्रीन भारत अभियान – वृक्षारोपण को बढ़ावा देना।
2021 ग्लासगो सम्मेलन (COP26) – भारत ने 2070 तक "नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन" का लक्ष्य तय किया।
---
निष्कर्ष
भारत ने पिछले दशकों में कई सम्मेलन और नीतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आज जरूरत है कि इन नीतियों को सिर्फ कागज़ पर न रखकर ज़मीनी स्तर पर लागू किया जाए। हर नागरिक को भी अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी – जैसे वृक्षारोपण, पानी-बिजली की बचत और प्लास्टिक का कम उपयोग। तभी हम आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण दे पाएंगे।
---
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. भारत की पहली राष्ट्रीय पर्यावरण नीति कब बनी?
👉 वर्ष 2006 में।
Q2. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का गठन कब हुआ?
👉 2010 में, पर्यावरण विवादों को सुलझाने के लिए।
Q3. भारत ने पेरिस समझौते में क्या संकल्प लिया?
👉 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 33–35% की कमी और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा।
---

Post a Comment